इंडस जल संधि (Indus Water Treaty) – भारत-पाकिस्तान के बीच पानी का ऐतिहासिक समझौता
इंडस जल संधि, भारत और पाकिस्तान के बीच एक ऐतिहासिक समझौता है, जो 1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता से हुआ था। यह संधि सिंधु नदी प्रणाली के जल के बंटवारे को लेकर बनाई गई थी, ताकि दोनों देशों के बीच पानी को लेकर विवाद न हो।
संधि की पृष्ठभूमि
1947 में भारत-पाकिस्तान का बंटवारा हुआ, तब सिंधु नदी प्रणाली की मुख्य नदियाँ भारत से होकर पाकिस्तान जाती थीं। इस स्थिति ने पाकिस्तान को जल संकट में डाल दिया और विवाद की आशंका बन गई।

मुख्य बिंदु:
1951: बातचीत की शुरुआत
1960: संधि पर हस्ताक्षर (कराची में)
किन नदियों को कैसे बाँटा गया?
भारत को मिलीं नदियाँ:
रावी
ब्यास
सतलुज
पाकिस्तान को मिलीं नदियाँ:
सिंधु
झेलम
चिनाब

संधि की मुख्य शर्तें
भारत, पाकिस्तान को पश्चिमी नदियों के जल की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करेगा
दोनों देशों को जल सर्वेक्षण और जानकारी साझा करनी होगी
किसी भी विवाद की स्थिति में पहले बातचीत, फिर मध्यस्थता और अंत में अंतरराष्ट्रीय न्यायाधिकरण का सहारा लिया जा सकता है
वर्तमान परिप्रेक्ष्य में संधि
हाल के वर्षों में भारत ने इस संधि को लेकर नाराजगी जताई है, खासकर उरी और पुलवामा हमलों के बाद। 2023 में भारत ने पाकिस्तान को नोटिस भेजा कि वह संधि की पुन: समीक्षा चाहता है।
निष्कर्ष
इंडस जल संधि अब तक दुनिया की सबसे सफल जल संधियों में से एक मानी जाती है। लेकिन बदलते राजनीतिक हालात और जलवायु परिवर्तन के दौर में इस पर पुनः चर्चा की आवश्यकता है।
